ईद का त्यौहार पर निबंध, मीठी ईद, ईद-उल-फ़ित्र |Eid ka Tyohar par nibandh, Mithi Eid, Eid-Ul-Fitr.
ईद का त्यौहार पर निबंध, Eid ka Tyohar par nibandh, ईद के बारे में. ईद विषय पर जानकारी | यहाँ हम ईद-उल-फ़ित्र यानि मीठी ईद के विषय में लिख रहे हैं |
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| दिल्ली की जामा मस्जिद में ईद की नमाज़ पढ़ते लोग |
ईद का त्यौहार पर निबंध, Eid ka Tyohar par nibandh, परिचय |
ईद का त्यौहार पर निबंध, Eid ka Tyohar par
nibandh,
हमारा भारत देश विभिन्न संस्कृति और सभ्यताओं का देश है | भारत में अनेकों धर्म के लोग एक साथ मिलकर रहते हैं | अपनी संस्कृति एक दूसरे के साथ बांटते हैं | यहाँ सभी तरह के त्यौहार मनाये जाते हैं | इन त्योहारों में एक ईद का त्यौहार भी है | ईद का त्यौहार मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा मनाया जाता है | इस्लामी कैलेंडर वर्ष में दो ईद मनाई जाती हैं| ईद उल फ़ित्र और ईद उल अज़हा या ईद उल जुहा | ईद-उल-फ़ित्र रमज़ान के महीने के ठीक बाद आती है | इसे मीठी ईद भी कहा जाता है | ईद-उल-अज़हा, मीठी ईद के ढाई महीने बाद मनाई जाती है | भारत में ईद-उल-जुहा को बकरा ईद या बकरीद भी कहते हैं | यहाँ हम ईद-उल-फ़ित्र यानि मीठी ईद के विषय में लिख रहे हैं | यह त्यौहार मूल रूप से प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है | ईद का त्यौहार मुस्लिम समाज के लोग पूरे हर्ष के साथ मनाते हैं | जिसकी शुरुआत सुबह की नमाज़ के साथ होती है |
ईद का त्यौहार कब मनाया जाता है?
यह त्यौहार रमज़ान के महीने के बाद शव्वाल के महीने की पहली तारीख़ को मनाया जाता है | जिसकी शुरुआत मुस्लिम मान्यता के अनुसार नए चाँद के साथ होती है | जिसे ईद का चाँद भी कहा जाता है | रमज़ान के पूरे महीने में मुस्लिम लोग रोज़े रखते हैं | जिसके उपहार स्वरूप ईद मनाई जाती है | चाँद देख कर सभी लोग ख़ुशी प्रकट करते हुए एक दुसरे को ईद की बधाई देते हैं तथा ईश्वर को धन्यवाद देते हैं |
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| दिल्ली की जमा मस्जिद का एक दृश्य |
ईद का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?
ईद का त्यौहार प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है | सभी इस त्यौहार को मिल जुल कर मानते हैं | मुस्लिम लोग इस त्यौहार में ईश्वर का धन्यवाद करते हैं जिसने उनको रमजान के सभी रोज़े रखने की शक्ति प्रदान की | यह त्यौहार अमीर लोगों को ग़रीबों को साथ लेकर चलने की भी शिक्षा देता है | ईद की नमाज़ से पहले सभी लोग गरीब लोगो के लिए दान करते हैं जिसको फितरा कहा जाता है | फितरा देना सभी के लिए वाजिब होता है | छूटे बच्चों का फितरा उनके परिजनों द्वारा अदा किया जाता है | फ़ितरा को ज़कात-उल फ़ित्र भी कहते हैं | इसका उस गरीब वर्ग की मदद करना होता है जिसकी आय बहुत कम है और जो त्यौहार पर वस्त्र नहीं खरीद सकते | जब सभी लोग गरीबों के लिए ज़कात-उल फ़ित्र देते हैं तो यह उन गरीबों तक पहुंचाया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप वह लोग भी ईद मनाते हैं|
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| एक व्यंजन |
ईद का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?
ईद की नमाज़ |
ईद के दिन सभी सुबह उठते हैं तथा नहा धो कर नए कपड़े पहनते हैं | अपने ऊपर इत्र भी लगते हैं | उसके बाद सूरज निकलने के कुछ समय बाद ईद की नमाज़ जिसे दोगाना कहा जाता है, पढ़ने नजदीक के बड़े ईदगाह जाते हैं | ईदगाह में दोगाना पढ़ी जानती है | नमाज़-ऐ-दोगाना में लोग ईश्वर से रोज़े और उनकी प्रार्थनाओं की कुबूल होने की प्रार्थना करते हैं| नमाज़ के बाद सभी लोग एक दुसरे से गले मिलते हैं | माना जाता हैं के गले मिलते समय वह सभी अपने पुराने झगड़े ख़त्म कर देते हैं | गले मिलते हुए सभी एक दुसरे को ईद मुबारक कहते हैं | ईद मुबारक का अर्थ ईद की शुभकामनाएं होता है | घर आकर सभी दुसरे से खुशियाँ बांटते हुए ईद के तोहफे देते हैं | तोहफों का आदान प्रदान होता है | अपने मित्रों और सम्बन्धियों को भोजन पर निमंत्रण दिया जाता है | इस दिन कई तरह के व्यंजन बनाये जाते हैं | जैसे खीर, सेवईया, हलवा, और मीठी और चटपटी चीजें बनाई जाती हैं |
ईद की वेशभूषा |
ईद के दिन के लिए कोई खास वस्त्र निश्चित नहीं हैं | लोग इस दिन नए वस्त्र पहनते हैं | प्राय कुरता पजामा और सर पर टोपी पहनते हैं | इसके अलावा वह इत्र भी लगते हैं |
बच्चों की ईद/ बच्चों में ईद का महत्व |
ईद का दिन वैसे तो सभी उम्र के लोगों के लिए ख़ुशी का त्यौहार है परन्तु इसकी सबसे ज्यादा ख़ुशी बच्चों में देखने को मिलती है | क्योंकि इस दिन उनको नए कपड़ों के साथ उनके बड़ों से खर्च करने के लिए कुछ पैसे मिलते हैं | जिसको इदी कहा जाता है | इसके बाद बच्चे नज़दीक के मेले में जाते हैं | मेले में तरह तरह की खाने की चीजों के शाथ बहुत से झूले भी झूलते हैं और अपने लिए कई प्रकार के खिलोने भी खरीदते हैं | इसके अलावा सम्बन्धियों के घर जाने पर भी उनको सभी से ईदी मिलती है |
ईद का त्यौहार हमें क्या शिक्षा देता है?
ईद का त्यौहार हमें मिलजुल कर रहने और एक दुसरे का सम्मान करने की शिक्षा देता है | इसके अलावा यह गरीब लोगों की सहायता करने के लिए भी हमें प्रेरित करता है | यह हमें ईश्वर के आख़िरी सन्देष्टा हज़रत मोहम्मद के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है | उनके आदर्शों में प्रमुख हैं - सच बोलना, ईश्वर की उपशना करना, मिलजुल कर रहना, गरीबो के लिए दयावान रहना आदि |
पाठकों से |
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